शनिवार, 2 जून 2012

गीत -------गंगा केवल नदी नहीं है


गंगा केवल नदी नहीं है ,
    मां   की ममता है ,
सदा सींचती आई संस्कृति 
  नव सोपान दिए 
कल कल छल छल बहती जाती 
जग का भार लिए 
इसकी पावनता की जग में 
कोई समता है ?

जटा जूट से शिव की उतरी 
थी,    निर्मलता लेकर 
किन्तु मिला क्या इसको 
जग को, जीवन का फल देकर 
अन्नपूर्णा कल्प वृक्ष  सी 
 इसमें क्षमता है ,
  
आज कह रही सुरसरि हमसे 
मन में पीर  लिए 
कौन बनेगा भागीरथ जो कलि का कलुष हरे 
मिले ज्योति से ज्योति, दीप से 
तम भी डरता है ,
              ----------डॉ. मधु प्रधान 
Madhu.pradhan.kanpur@gmail.com


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