नगर बसाये तटों पर , हरियाये वन बाग़ ,
सूख रहा है स्रोत वह , जाग बावरे जाग ,
मात्र नदी गंगा नहीं ,यह जीवन की धार,
शुद्ध ह्रदय ले आत्म बल ,अब तो इसे संवार,
अगर हौसला ह्रदय में ,हो दृढ़ निश्चय स्नेह ,
रहित प्रदूषण गंग हो , तनिक नहीं संदेह ,
निकट नगर आते हुई ,श्लथ लहरें गति मंद ,
तड़प कहे भागीरथी , करो प्रदूषण बंद ,
---------डॉ. मधु प्रधान
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