भारत माता के चरणों में शब्द पुष्पांजलि
बदते चलो,कहते चलो ,जयतु मातु भारती
जयतु मातु भारती , जयतु मातु भारती
गंग- जमुन कंठ हार
मस्तक हिमगिरि श्रृंगार
सागर भी गदगद है
जननी के पग पखार
दिवस रैन करते हैं ,सूर्य चन्द्र आरती
जयतु मातु भारती , जयतु मातु भारती
मन में भर उमंग लो
विजय की तरंग हो
मुस्कराती जिन्दगी में
आत्म -गर्व रंग हो
वीरता स्वयं करों में ,विजय माल धारती
जयतु मातु भारती , जयतु मातु भारती
जोश हो विवेक युक्त
खाइयों को पाट दो
वारिद सा समरस हो
नेह - नीर बाँट दो
शक्तिमय उदारता ,भविष्य को संवारती
जयतु मातु भारती , जयतु मातु भारती
------------डॉ. मधु प्रधान
