शुक्रवार, 11 मई 2012

 बेटियों पर कुछ दोहे 

बेटी तो  इक ऋचा   है ,यह  शक्ति  यह   मंत्र
बिन इसकी मुस्कान के ,जीवन केवल यन्त्र 

बेटी है खिलती   कली , प्राणों    का   मकरंद 
बेटी से   घर  घर लगे ,यह   जीवन   का  छंद 

संबंधों  का  सेतु   है , यह   दो  घर  की  लाज
घर  आँगन  महकाएगी , इसे  संभालो आज 

बेटा घर  का  मुकुट तो , बेटी  घर  का   नाज़ 
हर पल ख़ुशी बिखेरती ,दिल  पर करती राज़  

बेटी चिड़ियों की चहक ,मृदु  वंशी  की   तान  
सबको खुशियाँ  बांटती ,खुद से रह अनजान 
                                             (सर्वाधिकार सुरक्षित )

                                 ----------डॉ. मधु प्रधान 

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