बेटियों पर कुछ दोहे
बेटी तो इक ऋचा है ,यह शक्ति यह मंत्र
बिन इसकी मुस्कान के ,जीवन केवल यन्त्र
बेटी है खिलती कली , प्राणों का मकरंद
बेटी से घर घर लगे ,यह जीवन का छंद
संबंधों का सेतु है , यह दो घर की लाज
घर आँगन महकाएगी , इसे संभालो आज
बेटा घर का मुकुट तो , बेटी घर का नाज़
हर पल ख़ुशी बिखेरती ,दिल पर करती राज़
बेटी चिड़ियों की चहक ,मृदु वंशी की तान
सबको खुशियाँ बांटती ,खुद से रह अनजान
(सर्वाधिकार सुरक्षित )
----------डॉ. मधु प्रधान
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